नवरात्रि के 9 दिनों में किस देवी की पूजा होती है? यह सवाल हर साल नवरात्रि शुरू होते ही लाखों लोग गूगल पर पूछते हैं। जवाब है: मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की, जिन्हें “नवदुर्गा” कहा जाता है। हर दिन एक अलग स्वरूप की पूजा होती है, जिसकी शुरुआत मां शैलपुत्री से होती है और आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ पूरी होती है।
इस साल शारदीय नवरात्रि ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हुई है। अगर आप व्रत रख रहे हैं या घर पर पूजा कर रहे हैं, तो इस आर्टिकल में आपको हर दिन की देवी, उनका स्वरूप और पूजा से जुड़ी ज़रूरी बातें आसान भाषा में मिल जाएंगी।
नवरात्रि के 9 दिन और 9 देवियां: एक नज़र में
| दिन | देवी का स्वरूप | वाहन | आमतौर पर चढ़ने वाला भोग |
|---|---|---|---|
| पहला दिन | मां शैलपुत्री | वृषभ (बैल) | देसी घी |
| दूसरा दिन | मां ब्रह्मचारिणी | पैदल, तपस्विनी रूप | शक्कर या मिश्री |
| तीसरा दिन | मां चंद्रघंटा | सिंह | दूध या खीर |
| चौथा दिन | मां कूष्मांडा | सिंह | मालपुआ |
| पांचवां दिन | मां स्कंदमाता | सिंह | केला |
| छठा दिन | मां कात्यायनी | सिंह | शहद |
| सातवां दिन | मां कालरात्रि | गधा | गुड़ |
| आठवां दिन | मां महागौरी | वृषभ (बैल) | नारियल या हलवा-पूरी |
| नौवां दिन | मां सिद्धिदात्री | कमल या सिंह | तिल, हलवा, खीर |
ध्यान दें: भोग और कुछ मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में थोड़ी अलग हो सकती हैं। अपने परिवार या पंडित जी की परंपरा को ही प्राथमिकता दें।
नवरात्रि के हर दिन की देवी: विस्तार से
1- पहला दिन: मां शैलपुत्री
“शैल” का मतलब पर्वत होता है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल रहता है और ये बैल पर सवार होती हैं। पहले दिन ही कलश स्थापना (घटस्थापना) की जाती है।
2- दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली। इन्हें तपस्या और संयम की देवी माना जाता है। इनके एक हाथ में जप की माला और दूसरे में कमंडल होता है। विद्यार्थी और साधना करने वाले लोग इस दिन खास तौर पर इनकी पूजा करते हैं।
3- तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र बना होता है, इसी वजह से इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। ये सिंह पर सवार रहती हैं और इनके दस हाथ माने जाते हैं। इन्हें साहस और शांति देने वाली देवी माना जाता है।
4- चौथा दिन: मां कूष्मांडा
मान्यता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की सी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति कहा जाता है। इनके आठ हाथ माने जाते हैं, इसलिए इन्हें “अष्टभुजा” भी कहते हैं।
5- पांचवां दिन: मां स्कंदमाता
भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है। उनकी माता होने की वजह से देवी को स्कंदमाता कहा जाता है। ये कमल के आसन पर बैठती हैं और गोद में बाल स्कंद को लिए रहती हैं। इन्हें मातृत्व और ममता का प्रतीक माना जाता है।
6- छठा दिन: मां कात्यायनी
ऋषि कात्यायन के घर जन्म लेने की वजह से देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। माना जाता है कि महिषासुर का वध इन्होंने ही किया था, इसलिए इन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहते हैं। कई जगहों पर विवाह की इच्छा रखने वाली कन्याएं इस दिन इनकी पूजा करती हैं।
7- सातवां दिन: मां कालरात्रि
मां कालरात्रि का रूप सबसे उग्र माना जाता है। इनका रंग गहरा काला और वाहन गधा होता है। हालांकि, भक्तों के लिए ये शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए इन्हें “शुभंकारी” भी कहा जाता है। मान्यता है कि ये बुरी शक्तियों और भय का नाश करती हैं।
8- आठवां दिन: मां महागौरी
मां महागौरी का रंग बहुत गोरा और स्वरूप शांत माना जाता है। ये बैल पर सवार होती हैं और सफेद वस्त्र धारण करती हैं। इसी दिन को दुर्गा अष्टमी कहा जाता है, और कई घरों में इसी दिन कन्या पूजन किया जाता है।
9- नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री
मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री भक्तों को सिद्धियां प्रदान करती हैं। ये कमल के आसन पर विराजमान होती हैं और इनकी चार भुजाएं मानी जाती हैं। नवमी के दिन हवन और कन्या पूजन के साथ नवरात्रि की पूजा पूरी की जाती है। कई परिवार अष्टमी या नवमी, दोनों में से किसी एक दिन कन्या पूजन करते हैं।
कभी-कभी तिथि और दिन में फर्क क्यों दिखता है?
कई बार पंचांग के अनुसार कोई तिथि दो दिन में बंट जाती है या एक दिन घट जाती है। इस वजह से नवरात्रि के किसी साल 8 या 10 दिन तक का फर्क दिख सकता है, और किस दिन कौन सी देवी की पूजा है, इसमें भी अलग-अलग पंचांगों में थोड़ा अंतर आ सकता है। इस साल भी अलग-अलग वेबसाइटों पर शुरुआत की तारीख और दशहरे की तारीख में फर्क दिख रहा है। इसलिए व्रत, कलश स्थापना और कन्या पूजन की सटीक तारीख और मुहूर्त के लिए अपने शहर के पंचांग या अपने पंडित जी से ज़रूर पूछ लें।
साल में कितनी बार आती है नवरात्रि?
साल में मुख्य रूप से दो नवरात्रि मनाई जाती हैं:
- चैत्र नवरात्रि: वसंत ऋतु में, मार्च-अप्रैल के आसपास।
- शारदीय नवरात्रि: शरद ऋतु में, सितंबर-अक्टूबर के आसपास, जो सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है।
इनके अलावा आषाढ़ और माघ महीने में गुप्त नवरात्रि भी आती है, जिसे खासकर साधना करने वाले लोग मनाते हैं।
नवरात्रि में घर पर पूजा कैसे करें? (आसान तरीका)
- पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें और जौ बोएं।
- रोज़ सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और उस दिन की देवी का ध्यान करें।
- देवी को फूल, अक्षत, धूप-दीप और उनका प्रिय भोग चढ़ाएं।
- दुर्गा चालीसा, देवी के मंत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, जितना आपके लिए संभव हो।
- शाम को आरती करें।
- अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन करें और हवन करें।
पूजा के तरीके हर परिवार और क्षेत्र में अलग हो सकते हैं। कोई एक तरीका अकेला सही या गलत नहीं है, जो आपके घर की परंपरा हो उसी का पालन करें।
व्रत रखने वालों के लिए ज़रूरी बात
अगर आपको कोई बीमारी है, जैसे डायबिटीज़ या ब्लड प्रेशर, या आप गर्भवती हैं, तो लंबा उपवास रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। पानी, फल और सेंधा नमक वाली सादी चीज़ें लेकर भी व्रत रखा जा सकता है। व्रत आस्था का विषय है, लेकिन अपनी सेहत की अनदेखी न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है?
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है और इसी दिन कलश स्थापना की जाती है।
नवदुर्गा के नौ स्वरूपों के नाम क्या हैं?
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
दुर्गा अष्टमी पर किस देवी की पूजा होती है?
अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा की जाती है।
कन्या पूजन कब किया जाता है?
ज़्यादातर लोग अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। कौन सा दिन चुनना है, यह आपके परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है।
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में क्या फर्क है?
दोनों में मां दुर्गा के इन्हीं नौ स्वरूपों की पूजा होती है। फर्क बस मौसम और समय का है: चैत्र नवरात्रि वसंत में और शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु में आती है।
नवरात्रि 9 दिन की ही क्यों होती है?
“नवरात्रि” का मतलब ही नौ रातें है। इन नौ रातों को देवी के नौ स्वरूपों की उपासना से जोड़ा जाता है।
निष्कर्ष
नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित हैं, जिनमें हर रूप की अपनी कथा और मान्यता है। उम्मीद है इस आर्टिकल से आपको हर दिन की देवी के बारे में साफ जानकारी मिल गई होगी। आप इस साल किस देवी की पूजा सबसे ज़्यादा श्रद्धा से कर रहे हैं? कमेंट में बताइए।
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